आरएसएस ने क्यों बुलाई अचानक बड़ी बैठक? अमेरिका के टैरिफ विवाद पर रणनीति बनाने की तैयारी
August 16, 2025
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अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल मचा दी है। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 19
अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल मचा दी है। इसी मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 19 और 20 अगस्त को दिल्ली में एक आपातकालीन बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें स्वयं संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले समेत सभी शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे।
अमेरिका-भारत व्यापार तनाव: पृष्ठभूमि
हाल ही में अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने का फैसला किया। इस कदम पर भारत सरकार ने आपत्ति जताई थी, लेकिन अब तक अमेरिका अपने निर्णय से पीछे नहीं हटा है। इससे भारतीय उद्योगों और व्यापारियों में चिंता का माहौल है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। संघ ने कहा था कि अमेरिका स्वतंत्रता और लोकतंत्र का ढोंग करता है, लेकिन उसकी नीतियां वैश्विक स्तर पर आतंकवाद और तानाशाही को बढ़ावा देती हैं।
दिल्ली में होगी बड़ी बैठक
दिल्ली में होने वाली इस दो दिवसीय बैठक में न केवल संघ के शीर्ष पदाधिकारी बल्कि इसके सभी आर्थिक अनुषांगिक संगठन भी शामिल होंगे। अनुमान है कि 50 से 60 प्रमुख पदाधिकारी इसमें मंथन करेंगे।
इन संगठनों में लघु उद्योग भारती, सहकार भारती, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ और किसान संघ जैसे संगठन शामिल होंगे। संघ की ओर से कहा गया है कि इस बैठक में अमेरिकी टैरिफ के भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव और उससे बचाव की रणनीति पर गहन चर्चा होगी।
रणनीति और संभावित एजेंडा
इस बैठक का सबसे बड़ा उद्देश्य अमेरिकी नीति के खिलाफ ठोस आर्थिक और वैचारिक रणनीति तैयार करना है। संभावित एजेंडे में शामिल हो सकते हैं:
भारतीय लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) की सुरक्षा – अमेरिका के टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे और मझोले उद्योग हो सकते हैं। बैठक में इनके लिए विशेष पैकेज या नीतिगत सुझाव पर चर्चा होगी।
स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा – स्वदेशी जागरण मंच और अन्य संगठन घरेलू उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देने पर जोर देंगे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दबाव – केंद्र सरकार के सहयोग से अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति पर विचार हो सकता है।
किसानों और मजदूरों पर प्रभाव – किसान संघ और भारतीय मजदूर संघ बताएंगे कि इस टैरिफ नीति का कृषि उत्पादों और श्रमिक वर्ग पर क्या असर पड़ सकता है।
बैठक में बीजेपी की मौजूदगी
खबरें यह भी हैं कि बैठक में बीजेपी और केंद्र सरकार के कुछ बड़े नेता भी शामिल हो सकते हैं। आमतौर पर संघ की आर्थिक समूह बैठकों में शीर्ष अधिकारी शामिल नहीं होते, लेकिन इस बार हालात इतने गंभीर हैं कि स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह भी मौजूद रहेंगे।
संघ का मुखपत्र और अमेरिका पर हमला
संघ ने अपने मुखपत्र के जरिए पहले ही अमेरिका को आड़े हाथों लिया था। इसमें कहा गया था कि व्यापार युद्ध और टैरिफ अब संप्रभुता में हस्तक्षेप और उसे कमजोर करने का नया हथियार बन गए हैं। संघ का मानना है कि अमेरिका अपने राजनीतिक लाभ के लिए भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने का प्रयास करता है और यह नीति भारत की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए खतरनाक है।
क्यों अहम है यह बैठक?
यह बैठक केवल आर्थिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है। अमेरिका के इस कदम से भारत-अमेरिका संबंधों में तनातनी बढ़ सकती है। ऐसे में आरएसएस की भूमिका और विचारधारा सरकार की नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
आरएसएस लंबे समय से “स्वदेशी” नीति का समर्थन करता आया है। ऐसे में संभावना है कि यह बैठक भारत में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने तथा विदेशी दबावों का मुकाबला करने के लिए नए सुझाव और योजनाएं सामने लाएगी।
निष्कर्ष
अमेरिका के 50% टैरिफ फैसले ने भारत के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। आरएसएस की दिल्ली बैठक इसी चुनौती का समाधान ढूंढने और सरकार को वैचारिक व रणनीतिक मार्गदर्शन देने का प्रयास होगी। आने वाले दिनों में इस बैठक से निकले निर्णय भारत की आर्थिक और कूटनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।