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भारत बना साइबर हमलों का नंबर 1 टारगेट: ब्राजील और स्पेन भी पीछे

  • August 22, 2025
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डिजिटल इंडिया के दौर में जहां एक ओर देश टेक्नोलॉजी और इंटरनेट कनेक्टिविटी में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर साइबर अटैक का खतरा भी

भारत बना साइबर हमलों का नंबर 1 टारगेट: ब्राजील और स्पेन भी पीछे

डिजिटल इंडिया के दौर में जहां एक ओर देश टेक्नोलॉजी और इंटरनेट कनेक्टिविटी में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर साइबर अटैक का खतरा भी लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में स्विस साइबर सिक्योरिटी फर्म Acronis की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत साइबर हमलों का सबसे बड़ा निशाना बन चुका है। इस मामले में भारत ने ब्राजील और स्पेन जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मई 2025 तक 12.4% Windows डिवाइसों में मैलवेयर का पता चला था, जो जून में बढ़कर 13.2% हो गया। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करने वाले भारतीय यूजर्स सबसे ज्यादा साइबर क्राइम की चपेट में हैं।

2024 से 2025 तक साइबर अटैक में भारी इजाफा

Acronis की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर हमलों का पैटर्न 2024 की शुरुआत से लेकर 2025 की पहली छमाही तक तेजी से बदला है।

  • 2024 की शुरुआत में 20% आधिकारिक ईमेल्स पर साइबर अटैक दर्ज किए गए थे।
  • 2025 के शुरुआती महीनों तक यह आंकड़ा बढ़कर 25.6% पहुंच गया।

यानी कि लगभग हर चौथा ऑफिसियल ईमेल अब साइबर अपराधियों के निशाने पर है। सबसे खतरनाक बात यह है कि हैकर्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल करके साइबर अटैक को और ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक बना रहे हैं।

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कौन-कौन सी इंडस्ट्रीज हैं सबसे ज्यादा खतरे में?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Generative AI ने साइबर अपराधियों का काम और आसान कर दिया है। अब नकली ईमेल, फर्जी इनवॉइस और यहां तक कि डीपफेक स्कैम को पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है।

भारत में निम्नलिखित इंडस्ट्रीज सबसे ज्यादा खतरे में मानी जा रही हैं:

  1. मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री – बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और प्रोडक्शन यूनिट्स डेटा चोरी और सिस्टम हैकिंग के बड़े टारगेट हैं।
  2. आईटी सर्विस इंडस्ट्री – कंपनियों का बड़ा डेटा स्टोर होने के कारण यह सेक्टर साइबर अपराधियों की पहली पसंद है।
  3. टेलीकॉम सेक्टर – लाखों-करोड़ों यूजर्स के डेटा तक पहुंचने के लिए हैकर्स अक्सर टेलीकॉम कंपनियों को निशाना बनाते हैं।

Acronis के भारत और दक्षिण एशिया के जीएम राजेश छाबड़ा का कहना है कि कोविड महामारी के बाद हाइब्रिड वर्क मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी को और कमजोर कर दिया है। रिमोट वर्किंग सिस्टम की वजह से कंपनियां पहले से ज्यादा असुरक्षित हो गई हैं।

क्या है मैलवेयर?

मैलवेयर (Malware) एक ऐसा हानिकारक सॉफ्टवेयर या कोड होता है जिसे हैकर्स किसी कंप्यूटर, लैपटॉप या नेटवर्क सिस्टम में घुसपैठ करने के लिए बनाते हैं।

  • यह सिस्टम में घुसकर उसे कंट्रोल कर सकता है
  • डेटा चोरी कर सकता है।
  • डिवाइस को धीमा कर सकता है।
  • और कई बार डिवाइस को पूरी तरह क्रैश भी कर देता है।

भारत में जिस तेजी से मैलवेयर अटैक बढ़ रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में डिजिटल इकोसिस्टम पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है साइबर अटैक का खतरा?

  1. डिजिटल ट्रांजैक्शन का बढ़ना – यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट्स ने हैकर्स को नया मौका दिया है।
  2. रिमोट वर्किंग – सुरक्षित नेटवर्क की कमी से कंपनियों पर खतरा बढ़ा है।
  3. AI आधारित स्कैम – डीपफेक, फिशिंग ईमेल और फर्जी इनवॉइस को पहचानना मुश्किल।
  4. कम जागरूकता – आम यूजर्स और छोटे बिज़नेस अभी भी साइबर सिक्योरिटी के बुनियादी उपायों को नजरअंदाज करते हैं।

कैसे बचा जा सकता है साइबर अटैक से?

  1. हमेशा एंटीवायरस और फायरवॉल का इस्तेमाल करें।
  2. मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करें।
  3. संदिग्ध लिंक और ईमेल अटैचमेंट कभी न खोलें।
  4. सिस्टम और सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें।
  5. कंपनियां अपने कर्मचारियों को साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग दें।

निष्कर्ष

भारत का दुनिया में साइबर अटैक का सबसे बड़ा टारगेट बनना एक गंभीर चेतावनी है। अगर सरकार, कंपनियां और आम यूजर्स समय रहते सतर्क नहीं हुए तो आने वाले सालों में इसका असर इकॉनमी, प्राइवेसी और नेशनल सिक्योरिटी पर गहरा हो सकता है।

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