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बिहार चुनाव से पहले SIR पर बवाल: क्या INDIA गठबंधन BJP के खिलाफ नैरेटिव सेट करने में सफल होगा?

  • August 11, 2025
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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी पार्टियों के INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR)

बिहार चुनाव से पहले SIR पर बवाल: क्या INDIA गठबंधन BJP के खिलाफ नैरेटिव सेट करने में सफल होगा?

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी पार्टियों के INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर धांधली के आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह गठबंधन SIR को “वोट चोरी” की साजिश बताते हुए आंदोलन की राह पर है। बिहार से शुरू हुआ यह मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।

SIR कैसे बना बड़ा मुद्दा?

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (SIR) करने की घोषणा की। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे BJP को फायदा पहुंचेगा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया और यहां तक कि बिहार बंद और चुनाव बहिष्कार तक की चेतावनी दे डाली।

राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकजुटता

लोकसभा चुनाव के बाद बिखरे INDIA गठबंधन को SIR ने फिर से एक मंच पर ला खड़ा किया है।

  • राहुल गांधी के आवास पर INDIA गठबंधन के 25 दलों के 50 से ज्यादा नेता जुटे।
  • सभी ने एक सुर में SIR का विरोध करने और इसे आंदोलन का रूप देने का संकल्प लिया।
  • संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने SIR के खिलाफ मार्च और प्रदर्शन का ऐलान किया।

ममता बनर्जी और TMC की एंट्री

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को “बैकडोर से NRC लागू करने” की साजिश बताया और लोगों से किसी तरह का फॉर्म न भरने की अपील की। उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR के लिए दो साल का समय मांगा।

बिहार से “मताधिकार यात्रा” की शुरुआत

INDIA गठबंधन ने बिहार में मताधिकार यात्रा निकालने का फैसला किया है, जो 15 दिनों तक चलेगी। इसमें राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अन्य राज्यों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। यह यात्रा SIR और चुनाव में धांधली के मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी।

BJP और चुनाव आयोग पर सीधा हमला

विपक्ष का नैरेटिव साफ है—

  • BJP पर संवैधानिक संस्थाओं को “हाइजैक” करने का आरोप।
  • चुनाव आयोग को भी अब विपक्ष ने अपने निशाने पर लिया है, जैसे पहले ED और CBI पर आरोप लगाए जाते थे।

राष्ट्रीय असर और आने वाले चुनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR का मुद्दा बिहार से आगे बढ़कर बंगाल, महाराष्ट्र, असम और तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों में भी उठेगा। यह विपक्ष के लिए एक कॉमन कैंपेन थीम बन सकता है।

क्या विपक्ष का नैरेटिव सफल होगा?

इतिहास गवाह है कि चुनावों से पहले उठाए गए मुद्दे कभी हिट होते हैं, कभी फ्लॉप।

  • लोकसभा 2024 में विपक्ष ने आरक्षण, संविधान और लोकतंत्र पर खतरे का मुद्दा उठाया था, जिससे BJP का “400 पार” दावा कमजोर हुआ।
  • लेकिन सरकार बनाने में INDIA गठबंधन नाकाम रहा।
    इस बार SIR का मुद्दा वोट में तब्दील होगा या नहीं, यह चुनाव परिणाम ही तय करेगा।

FAQs

1. SIR क्या है?

SIR यानी “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण है, जिसमें मृतक, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए और नए नाम जोड़े जाते हैं।

2. विपक्ष SIR का विरोध क्यों कर रहा है?

विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए BJP चुनाव में धांधली कर रही है और विपक्षी समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।

3. क्या SIR केवल बिहार में हो रहा है?

फिलहाल विवाद बिहार से शुरू हुआ है, लेकिन विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया अन्य राज्यों में भी लागू की जा सकती है।

4. मताधिकार यात्रा का उद्देश्य क्या है?

यह यात्रा SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और BJP व चुनाव आयोग के खिलाफ माहौल बनाने के लिए है।

5. क्या SIR का मुद्दा BJP को नुकसान पहुंचा सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष इस मुद्दे को कितनी मजबूती से जनता के बीच पेश कर पाता है और क्या यह वोटिंग पैटर्न को बदल पाता है।

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