उम्र में धोखाधड़ी रोकने के लिए BCCI का बड़ा कदम: खिलाड़ियों की असली उम्र अब नहीं छुपेगी
- August 4, 2025
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब तक देश के
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब तक देश के
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उम्र में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से उम्र छुपाकर आयु-आधारित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों ने न केवल युवा क्रिकेट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ अन्याय भी किया है जो सही उम्र और योग्यता के साथ प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।
BCCI ने अब इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक ठोस रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत बोर्ड ने एक बाहरी एजेंसी की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है, जो खिलाड़ियों के दस्तावेज़ों और अन्य जानकारी की स्वतंत्र जांच करेगी। इसके लिए BCCI ने एक RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) भी जारी किया है, जिसके माध्यम से बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया गया है।
BCCI पहले से ही एक दो-स्तरीय आयु सत्यापन प्रणाली (Two-Tier Age Verification System) को अपनाता है। इस प्रक्रिया में दो अहम चरण शामिल होते हैं:
BCCI द्वारा नियुक्त की जाने वाली यह बाहरी एजेंसी खिलाड़ियों की पहचान, जन्म तिथि, निवास स्थान, और शैक्षणिक योग्यता जैसे सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी। इसकी नियुक्ति अगस्त 2025 के अंत तक होने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि हाल ही में कुछ खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में संदेहास्पद जानकारी पाई गई थी।
BCCI का उद्देश्य स्पष्ट है — वह किसी भी ऐसे खिलाड़ी को आयु आधारित प्रतियोगिताओं में प्रवेश नहीं करने देना चाहता जिसकी उम्र निर्धारित सीमा से अधिक है। इससे न केवल खिलाड़ियों के बीच निष्पक्षता बनी रहेगी बल्कि युवाओं में खेल के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।
BCCI ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए एजेंसियों के चयन के लिए कुछ कड़े मानदंड तय किए हैं:
BCCI द्वारा निर्धारित नियमों के तहत एजेंसी को निम्नलिखित दस्तावेजों की पुष्टि करनी होगी:
इस व्यापक जांच प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कागजों की जांच नहीं, बल्कि वास्तविकता की गहराई में जाकर खिलाड़ी की पृष्ठभूमि को जांचना है।
अगर कोई खिलाड़ी इस जांच प्रक्रिया में उम्र में धोखाधड़ी का दोषी पाया जाता है, तो BCCI उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। यह कार्रवाई खिलाड़ी की पात्रता रद्द करने से लेकर भविष्य की प्रतियोगिताओं से निष्कासन (ban) तक हो सकती है।
ऐसे मामलों का उदाहरण हाल ही में देखा गया था जब खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की उम्र को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि बाद में वह आरोप गलत साबित हुए, लेकिन इसने फिर से इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया और BCCI को इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
उम्र में धोखाधड़ी न केवल युवा क्रिकेट की नैतिकता और विश्वसनीयता को चोट पहुंचाती है, बल्कि यह प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अवसरों की चोरी भी है। कई खिलाड़ी जिन्हें सही उम्र और मेहनत के दम पर चयनित होना चाहिए था, वे ऐसे खिलाड़ियों की वजह से बाहर हो जाते हैं जो उम्र को छिपाकर गलत तरीके से चयन पा लेते हैं।
BCCI की यह नई व्यवस्था एक नए युग की शुरुआत हो सकती है, जहां पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ चयन होगा और खिलाड़ी केवल अपनी काबिलियत और असली उम्र के दम पर आगे बढ़ेंगे।
BCCI द्वारा उठाया गया यह कदम भारतीय क्रिकेट में ईमानदारी और पारदर्शिता को और मजबूती देगा। आयु-आधारित प्रतियोगिताएं अब और अधिक निष्पक्ष होंगी और युवा क्रिकेटरों के बीच भरोसा बढ़ेगा कि उन्हें उनके टैलेंट और परिश्रम के आधार पर ही जगह मिलेगी। साथ ही यह कदम अन्य खेल संघों और बोर्ड्स के लिए भी एक मिसाल बनेगा कि उम्र में धोखाधड़ी जैसे गंभीर मुद्दों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
भविष्य में इस प्रणाली के और भी सख्त और तकनीकी रूप से उन्नत होने की संभावना है, जिससे भारतीय क्रिकेट की नींव और भी मजबूत हो सकेगी।
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BCCI ने उम्र में धोखाधड़ी को रोकने के लिए यह कदम उठाया है क्योंकि कुछ मामलों में खिलाड़ियों द्वारा गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे टूर्नामेंट में अनुचित लाभ उठाया जा रहा था।
BCCI अब एक बाहरी एजेंसी नियुक्त करेगा जो दस्तावेजों और हड्डी जांच (TW3) के माध्यम से खिलाड़ियों की उम्र का सटीक सत्यापन करेगी।
TW3 यानी टैनर व्हाइटहाउस 3 मेथड, एक मेडिकल टेस्ट है जो हड्डियों की ग्रोथ को मापकर व्यक्ति की जैविक उम्र का अनुमान लगाता है। यह टेस्ट U-16 लड़कों और U-15 लड़कियों पर लागू होता है।
नहीं, दस्तावेज जांच के साथ-साथ बायोलॉजिकल जांच भी अनिवार्य होगी, ताकि कोई भी खिलाड़ी झूठे प्रमाण पत्र के आधार पर गलत आयु पेश न कर सके।
ऐसी एजेंसियां जिनके पास भारत भर में डिजिटल और फिजिकल सत्यापन करने की क्षमता हो और कम से कम 3 साल का अनुभव हो, वे बोली लगा सकती हैं।