Google Chrome पर 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर देने वाले अरविंद श्रीनिवास कौन हैं?
August 14, 2025
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टेक दुनिया में इस समय सबसे बड़ी चर्चा Google Chrome को लेकर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने अचानक 34.5 बिलियन डॉलर का ऑल-कैश ऑफर देकर पूरे
टेक दुनिया में इस समय सबसे बड़ी चर्चा Google Chrome को लेकर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Perplexity AI ने अचानक 34.5 बिलियन डॉलर का ऑल-कैश ऑफर देकर पूरे उद्योग को चौंका दिया है। दिलचस्प बात यह है कि Google Chrome बिक्री के लिए आधिकारिक तौर पर उपलब्ध भी नहीं है, फिर भी यह बोली लगाई गई। यह कदम न केवल साहसिक है बल्कि अभूतपूर्व भी, क्योंकि Perplexity AI की वर्तमान वैल्यूएशन लगभग 14 बिलियन डॉलर है — यानी ऑफर इसकी खुद की वैल्यूएशन से ढाई गुना से भी अधिक है।
Perplexity AI का यह कदम साफ तौर पर AI सर्च रेस में अपनी स्थिति को मजबूत करने और सीधे Google Chrome के लगभग 3 बिलियन सक्रिय उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश है। अगर यह डील होती है, तो Perplexity को न केवल एक ब्राउज़र मिलेगा, बल्कि सर्च और इंटरनेट ब्राउज़िंग पर गहरा प्रभाव डालने का मौका भी।
अरविंद श्रीनिवास – ऑफर के पीछे का दिमाग
इस साहसिक ऑफर के पीछे हैं अरविंद श्रीनिवास, जो Perplexity AI के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। भारतीय मूल के अरविंद का टेक और AI क्षेत्र में सफर बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत आईआईटी मद्रास से की, जहां 2017 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डुअल डिग्री पूरी की। इसके बाद वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले गए और कंप्यूटर साइंस में पीएचडी हासिल की।
अरविंद का करियर 2018 में OpenAI में रिसर्च इंटर्न के रूप में शुरू हुआ। उन्होंने 2020 से 2021 के बीच Google और DeepMind जैसी कंपनियों में काम किया और AI रिसर्च में गहरी पकड़ बनाई। बाद में वे फिर से OpenAI में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में लौटे। 2022 में, उन्होंने एंडी कोन्विंस्की, डेनिस यारात्स और जॉनी हो के साथ मिलकर Perplexity AI की नींव रखी।
आज, Perplexity AI को Nvidia और जापान के SoftBank जैसे दिग्गज निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, और कंपनी अब तक लगभग 1 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है।
Google Chrome को बेचने का विचार कैसे आया?
यह पूरा मामला अमेरिकी अदालत में चल रहे एंटीट्रस्ट मुकदमों की पृष्ठभूमि में आया है। हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने फैसला सुनाया कि Google का ऑनलाइन सर्च पर अनुचित एकाधिकार है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने यहां तक सुझाव दिया कि प्रतिस्पर्धा बहाल करने के लिए Google Chrome को बेचना एक विकल्प हो सकता है।
भले ही Google Chrome को बिक्री के लिए आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध नहीं किया गया है, लेकिन Perplexity AI ने यह अवसर देखते हुए बड़ा दांव खेलने का निर्णय लिया। यह ऑफर न केवल बाजार को चौंकाने वाला है बल्कि यह गूगल की AI रणनीति के केंद्र में मौजूद एक प्रोडक्ट को चुनौती भी देता है।
Perplexity AI का वादा – अगर डील होती है तो क्या बदलेगा?
Perplexity AI ने इस डील के लिए कई वादे किए हैं। कंपनी का कहना है कि अगर वह Google Chrome खरीदने में सफल होती है, तो:
Chrome का कोड (Chromium) ओपन-सोर्स बना रहेगा – इसका मतलब है कि डेवलपर्स और टेक कंपनियां इसे पहले की तरह इस्तेमाल कर सकेंगी।
दो साल में 3 बिलियन डॉलर का निवेश – ब्राउज़र को और तेज़, सुरक्षित और AI इंटीग्रेशन के साथ बेहतर बनाने के लिए।
डिफॉल्ट सर्च इंजन में कोई बदलाव नहीं – यानी Chrome के मौजूदा यूज़र्स को तुरंत कोई बदलाव महसूस नहीं होगा।
कंपनी का दावा है कि कई बड़े निवेश फंड इस डील को फाइनेंस करने के लिए तैयार हैं, हालांकि उनके नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
Google Chrome में OpenAI और Yahoo की दिलचस्पी
दिलचस्प बात यह है कि Perplexity AI अकेली कंपनी नहीं है जो Google Chrome में दिलचस्पी दिखा रही है। कोर्ट में पेश दस्तावेज़ों से पता चला है कि OpenAI और Yahoo ने भी Chrome खरीदने की संभावनाएं तलाशीं।
2023 में, OpenAI ने गूगल से ChatGPT के लिए सर्च API एक्सेस मांगा था, लेकिन गूगल ने इसे मना कर दिया क्योंकि दोनों कंपनियां सर्च मार्केट में सीधी प्रतिद्वंद्वी हैं। फिलहाल OpenAI अपने चैटबॉट की सर्च क्षमताओं के लिए Microsoft Bing पर निर्भर है। अगर Chrome किसी दूसरी कंपनी के हाथ जाता है, तो यह सर्च इंजन बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है।
Google Chrome का महत्व – क्यों इतनी बड़ी बोली?
Google Chrome केवल एक ब्राउज़र नहीं है; यह गूगल की पूरी AI और सर्च रणनीति की रीढ़ है। Chrome के 3 बिलियन से अधिक यूज़र्स रोजाना अरबों सर्च करते हैं, जिससे गूगल को डेटा मिलता है। यह डेटा गूगल के AI मॉडल को बेहतर बनाता है और नए फीचर्स जैसे AI-generated Search Overview को सपोर्ट करता है।
यही कारण है कि विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल इतनी आसानी से Chrome को नहीं बेचेगा। Chrome की मदद से गूगल न केवल सर्च मार्केट पर अपनी पकड़ बनाए रखता है, बल्कि विज्ञापन से होने वाली कमाई को भी सुरक्षित करता है।
भविष्य अनिश्चित, लेकिन खेल बड़ा
इस समय यह कहना मुश्किल है कि Perplexity AI का ऑफर सफल होगा या नहीं। गूगल ने अभी तक Google Chrome बेचने के कोई संकेत नहीं दिए हैं और उसने अमेरिकी अदालत के फैसले को चुनौती देने की योजना बनाई है।
अगर अमेरिकी न्याय विभाग गूगल के एकाधिकार को खत्म करने के लिए Chrome की बिक्री को अनिवार्य करता है, तो यह टेक इंडस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वहीं, अगर Perplexity AI किसी तरह यह डील पूरी कर लेता है, तो AI सर्च रेस का पूरा परिदृश्य बदल सकता है।
निष्कर्ष
Google Chrome को खरीदने का Perplexity AI का 34.5 बिलियन डॉलर का ऑफर सिर्फ एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और AI इंडस्ट्री के भविष्य पर सीधा असर डालने वाली घटना है। यह सौदा गूगल के लिए एक बड़ी चुनौती है और बाकी कंपनियों के लिए एक मौका। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि Chrome गूगल के पास रहेगा या इतिहास में पहली बार किसी दूसरी कंपनी के हाथ जाएगा।
1. क्या Google Chrome वास्तव में बिक्री के लिए उपलब्ध है?
नहीं, Google Chrome आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अमेरिकी अदालत में चल रहे एंटीट्रस्ट केस के चलते यह चर्चा में है कि Chrome को बेचना गूगल के एकाधिकार को कम करने का एक तरीका हो सकता है।
2. Perplexity AI कौन सी कंपनी है?
Perplexity AI एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 2022 में अरविंद श्रीनिवास, एंडी कोन्विंस्की, डेनिस यारात्स और जॉनी हो ने की थी। यह AI आधारित सर्च इंजन और नॉलेज प्लेटफॉर्म प्रदान करती है।
3. Perplexity AI ने Google Chrome के लिए कितना ऑफर दिया है?
कंपनी ने Google Chrome को खरीदने के लिए 34.5 बिलियन डॉलर का ऑल-कैश ऑफर दिया है, जो इसकी खुद की वैल्यूएशन (14 बिलियन डॉलर) से कहीं अधिक है।
4. अरविंद श्रीनिवास कौन हैं?
अरविंद श्रीनिवास Perplexity AI के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। उन्होंने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डुअल डिग्री और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की है।
5. क्या Google Chrome बेचने पर गूगल राज़ी हो जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल इतनी आसानी से Chrome नहीं बेचेगा क्योंकि यह न केवल सर्च मार्केट बल्कि उसकी AI रणनीति का भी अहम हिस्सा है।