गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी से जुड़े अमेरिकी केस में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने न्यूयॉर्क की एक अदालत को बताया है कि वह भारत के कानून मंत्रालय से संपर्क में है ताकि दोनों को आधिकारिक रूप से समन (नोटिस) भेजा जा सके। यह मामला पिछले साल से चल रहा है और इसमें अडानी पर गंभीर वित्तीय और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
नवंबर 2024 में अमेरिकी SEC ने न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में अपनी एक कंपनी को रिन्यूऐबल एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए 25 करोड़ डॉलर (लगभग 2,080 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। SEC का दावा है कि यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए बेहद फायदेमंद था और अगले 20 वर्षों में इसे 2 अरब डॉलर से अधिक का मुनाफा मिल सकता था।
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक निराधार और राजनीतिक प्रेरित केस है, जिसका कोई सबूत नहीं है।
कोर्ट में अब तक की कार्यवाही
11 अगस्त 2025 को न्यूयॉर्क की अदालत के मजिस्ट्रेट जज जेम्स आर. चो को अमेरिकी SEC ने सूचित किया कि भारतीय अधिकारियों ने अभी तक अडानी को समन नहीं भेजा है। यह जानकारी पिछली 27 जून की सुनवाई में दी गई स्थिति से लगभग समान है।
SEC का कहना है कि विदेशी नागरिकों को सीधे नोटिस भेजने का उनके पास अधिकार नहीं है। ऐसे में उन्हें भारत सरकार की मदद की जरूरत है। यही कारण है कि अब हेग सेवा कन्वेंशन (Hague Service Convention) के तहत नोटिस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
हेग सेवा कन्वेंशन क्या है?
हेग सेवा कन्वेंशन एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत विभिन्न देशों के बीच कानूनी और गैर-कानूनी दस्तावेजों का आदान-प्रदान आसान बनाया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों में चल रहे मुकदमों में प्रतिवादियों को नोटिस सही तरीके से मिल सके और वे कानूनी कार्यवाही में शामिल हो सकें।
SEC ने अदालत को बताया कि भारत सरकार से नोटिस भेजने के अनुरोध पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में कोर्ट की अगली सुनवाई तक इस मामले में और समय लग सकता है।
अडानी के खिलाफ आरोपों की गंभीरता
अडानी और उनके भतीजे पर लगे आरोप सिर्फ रिश्वत तक सीमित नहीं हैं। SEC का आरोप है कि यह एक सुनियोजित योजना थी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया गया। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह अडानी ग्रुप की वैश्विक साख को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
अडानी का पक्ष
अडानी ग्रुप ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है:
“हम इन आरोपों को पूरी तरह से नकारते हैं। यह राजनीतिक प्रेरित और बिना किसी ठोस सबूत के बनाया गया केस है। हमारा व्यवसाय हमेशा कानून के दायरे में रहकर किया गया है।”
आगे क्या हो सकता है?
यदि भारत सरकार हेग सेवा कन्वेंशन के तहत नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूरी करती है, तो अडानी और सागर अडानी को आधिकारिक रूप से अमेरिकी अदालत में पेश होना पड़ सकता है या फिर अपने वकीलों के माध्यम से जवाब देना होगा। इस प्रक्रिया में देरी से केस की सुनवाई भी खिंच सकती है।