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प्रज्वल रेवन्ना बलात्कार केस: साड़ी, अश्लील वीडियो और नौकरानी के साहस ने दिलाया इंसाफ

  • August 2, 2025
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कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा भूचाल उस वक्त आया जब पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा के पोते और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के गंभीर मामले में

प्रज्वल रेवन्ना बलात्कार केस: साड़ी, अश्लील वीडियो और नौकरानी के साहस ने दिलाया इंसाफ

कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा भूचाल उस वक्त आया जब पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा के पोते और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के गंभीर मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने 1 अगस्त 2025 को यह फैसला सुनाया और अब 2 अगस्त को सजा का ऐलान किया जाएगा। यह मामला केवल एक महिला का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों महिलाओं की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है जो वर्षों से न्याय का इंतज़ार कर रही हैं।

कैसे शुरू हुआ मामला?

यह मामला हासन जिले की एक पूर्व घरेलू सहायिका द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुआ। पीड़िता ने बताया कि उसके साथ दो बार बलात्कार किया गया और उसे धमकाकर चुप रहने को कहा गया। मामला तब गंभीर हो गया जब पीड़िता ने अपनी साड़ी और एक अश्लील वीडियो को सबूत के तौर पर पुलिस को सौंपा। इन सबूतों ने जांच को नई दिशा दी और आखिरकार कोर्ट ने उन्हें पर्याप्त और भरोसेमंद माना।

Prajwal Revanna rape case

सबूतों की ताकत: साड़ी और वीडियो

इस केस में दो अहम सबूत सामने आए — पीड़िता की साड़ी और एक आपत्तिजनक वीडियो। फॉरेंसिक जांच में साड़ी पर मिले डीएनए ने साबित कर दिया कि अपराध में प्रज्वल रेवन्ना ही शामिल थे। वहीं, वीडियो क्लिप ने अदालत को यह दिखा दिया कि घटना की वास्तविकता क्या थी।

पीड़िता ने बताया कि यह वीडियो उसने छुपाकर रिकॉर्ड किया था, जिससे उसे न्याय मिल सके। यह साहस एक आम महिला के लिए असाधारण है और न्याय व्यवस्था में विश्वास को और मजबूत करता है।

तेज़ सुनवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट की भूमिका

इस केस में न्यायिक प्रक्रिया बेहद तेज़ रही। मात्र 14 महीने में जांच पूरी हुई और फैसला भी आ गया, जो देश के लिए एक मिसाल है। कोर्ट ने इसे फास्ट ट्रैक किया और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रज्वल रेवन्ना को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता के बयान, डीएनए रिपोर्ट, और इलेक्ट्रॉनिक सबूत सभी आरोपी के खिलाफ स्पष्ट प्रमाण हैं।

राजनीतिक रसूख के बावजूद न्याय

प्रज्वल रेवन्ना का नाम कर्नाटक की राजनीति में बड़ा है। वे न केवल पूर्व प्रधानमंत्री का पोता हैं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री एचडी रेवन्ना के बेटे और स्वयं पूर्व सांसद रह चुके हैं। ऐसे में यह केस यह दिखाता है कि भारत में कानून सबके लिए समान है, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। अदालत ने राजनीतिक प्रभाव को दरकिनार कर न्याय दिया।

न्याय की प्रतीक बनी पीड़िता

यह मामला सिर्फ एक पीड़िता का नहीं था, बल्कि सभी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो यौन उत्पीड़न और शोषण का शिकार हुई हैं लेकिन चुप हैं। इस केस ने यह साबित कर दिया कि यदि पीड़िता साहस दिखाए और सबूतों के साथ सामने आए, तो न्याय संभव है।

क्या होगा अगला कदम?

अब सबकी निगाहें 2 अगस्त 2025 पर टिकी हैं, जब अदालत सजा की अवधि का ऐलान करेगी। भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार के लिए अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत आरोपी को कितनी सख्त सजा देती है।

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